Saturday, October 10, 2009

ये तन्हाई..


दिल की तन्हा बस्ती की कहानी है,
दूर दरिया है और प्यास बुझानी है.
कभी होती सुबह एक सुहानी है,
पर रात हमेशा विरहा की बितानी है.

एक पल को ठहर जाती सांसे है,
जब किसी के कदमों की आहट आती है.
मेरे मन में लाती कुछ राहत है,
पर ये तो हवा थी जो दरवाजा खटखटाती है.

इस बगीचे का कोई माली ना सही,
साथ सफर में कोई हमराही ना सही.
जीवन की तो सदा है ये रीत रही,
अकेला है जो सदा उसी की है जीत हुयी.

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