Monday, November 16, 2009

सनम बना लिया..



मोहब्बत को जिंदगी का सुरीला गीत बना दिया,
मैंने अपनी हर हार को जीत बना लिया.
हर अदा हर खता को मैंने संगीत बना लिया,
हर दर्द हर सजा को आज अपना मीत बना लिया.

काँटे हो गये हैरान उनको जो अपना अज़ीज़ बना लिया,
देखो मैंने अपनी दिल्लगी को अपना नसीब बना लिया.
जो थी मीलों दूर उस हँसी को करीब बुला लिया,
आखिर हर ज़ख्म हर दर्द को मैंने आज रकीब बना लिया.

टूट चुके ख्वाबों को समेटकर अपना कदम बना लिया,
राह की ठोकरों से दिल लगा उन्हें हमदम बना लिया.
जब से उस अनजाने साये को अपना सनम बना लिया,
हर सितम से मिलती है ख़ुशी कैसा ये वहम बना लिया.

मेरी तन्हाईयो ने अब नया एक गुलशन बना लिया,
फिर सावन को बुला खुशनुमा आगन बना लिया.
मैंने तो कब्र से निकल घूमी दुनिया ऐसा जनम बना लिया,
ए आँसू ए सिकन तुम्ही हो मेरे, तुम्हें अब अपना सनम बना लिया.

Thursday, November 12, 2009

मैंने इसी में सब कुछ पा लिया..



किसी की आँखों से बहते आँसुओ को थाम लिया,
मैंने उन्ही को अनमोल मोती मान लिया.
किसी की मौन छुपी भावनाओ को जान लिया,
मैंने उन्ही को अपना सच्चा साथी मान लिया.

किसी नन्ही जान के साथ तोतली जबान में गा लिया,
मैंने उसे ही अपने दिल का संगीत सुना लिया.
किसी गरीब को दिल से इज्ज़त का तोहफा थमा दिया,
मैंने इसी लेनदेन में अपने खुदा को पा लिया.

किसी नौजवान की आशाओ को और परवान चढ़ा दिया,
मैंने इसी में अपनी मंजिल के शिखर को पा लिया.
किसी शहीद की शहादत पर एक दीप जला लिया,
मैंने इसी में हर जनम का सुकून पा लिया.

किसी टूटे दिल को अपनी दोस्ती से मरहम लगा दिया,
मैंने इसी में अपने खोये इश्क का भरम मिटा लिया.
किसी भूखे को एक रात की रोटी का उपहार दिला दिया,
मैंने इसी में दुनिया का सबसे बड़ा पुरुस्कार हथिया लिया.

Tuesday, November 10, 2009

शायद किसी ने मुझे बुला लिया...


अपनी साँसों को उसकी साँस में उतार सकू,
उसके राहे-ए-गम से मै उसे पुकार सकू.
मुरझाये चेहरे को उसके मै निखार सकू,
गमों को मिटा हँसी को थोड़ा निहार सकू.

उनकी बातों से रुसवाई का अहसास किया,
उसने शायद बेवफा दुनिया पर विश्वास किया.
इश्क की राह के जख्मों ने उसे उदास किया,
कैसे कह दू मैंने भी बेवफाई का अहसास किया.

इश्क के आँसुओ को कहा किसने बहते देखा,
हँस दे दर्द में ऐसा किसको किसने सहते देखा.
हमने तो बहारों को भी एक दूसरे से कहते देखा,
हम नहीं जाती वहा जहा प्रेम लौ को जलते देखा.

उसके दर्द की कसक ने मेरी आँखों को रुला दिया,
बरसों बाद मेरे पत्थर दिल को पिघला दिया.
सुन उसकी दास्ता हमने भी अपना गम भूला लिया,
किस ने दी आवाज़, शायद फिर किसी ने मुझे बुला लिया.

Monday, November 09, 2009

बहुत आँसू तेरे बह गए..


रात अब बीत चुकी, आज फिर बहुत आँसू तेरे बह गये,
इस मतलबी दुनिया में, अब और कौन तेरे रह गये.
जब कभी तेरे आँसू गिरे, दर्द ओ गम हम सह गये,
आवाज़ तेरी जब भी उदास हुयी, खून के आँसू मेरे बह गये.

तेरी राहों में तुझे मिले काँटे, जख्म तेरे मुझ से कह गये,
शाम को थी तुम तन्हा, वीरानियों के सितम मुझ पे ढह गये.
जब कभी मैंने नगमे लिखे, पन्ने तेरी आहों से रंग गये,
उठा जब भी, कदम बढ़े, तेरे दर्द के साये मेरे संग गये.

माना राह में बेवफाई के घाव मिले, खामोश तुझे कर गये,
प्रीत की राह के ठोकर खाये, तन्हा मुसाफिर तुम रह गये.
सुन सको आवाज़ तो, मेरे हर लब्ज़ तुमसे कह गये,
क्या तुम्हारी गुजरी राहों के नग्मे ही, मेरे लिए अब रह गये.

तेरी सिसकियों की आह सुनी, क्या बताऊ कैसे हम सह गये,
ज़हर का था जैसे एक घूट मेरे लिए, तेरे जो आँसू बह गये.
पास था दरिया रहा मै प्यासा, फिर भी इसे हम सह गये,
मुक्कदर से मिलता इश्क ए दोस्त, कुछ ऐसा हवा के झोंके कह गये.

Friday, November 06, 2009

लेखनी से तुम वयक्त करो..



शब्दों से अभिव्यक्त करो,
तुम अपनी लेखनी से वयक्त करो.
किसी के अश्रु बूंदों का खारापन,
किसी की लाचारी का दर्द लिखो.

स्याही से उदघोष करो,
तुम अपनी कलम का विजयघोष करो.
किसी गरीब के नंगे तन,
किसी भूखे पेट की कहानी पर लिखो.

पंक्तियों से मस्तिष्क प्रभावित करो,
छन्दों से राष्ट्र भावना प्रचारित करो.
किसी शहीद की कुर्बान जवानी पर,
किसी देशभक्त की भूली निशानी पर लिखो.

वाक्यों से मानव कल्याण करो,
कविता से नव राष्ट्र का निर्माण करो.
फूट-पाथ पर गुजरी रातों की ठिठुरन,
भीख मांगते हाथो की कहानी लिखो.

शब्दों से अभिव्यक्त करो,
तुम अपनी लेखनी से वयक्त करो.
किसी के अश्रु बूंदों का खारापन,
किसी की लाचारी का दर्द लिखो.

Wednesday, November 04, 2009

तुम फिर से आओ..


मेरे ख्वाहिशों के आसमा में छायी धुंध की चादर फिर से हटाओ,
कब से हू प्यासा, आकर तुम फिर मेरी प्यास बुझाओ.
मेरे तपिश भरे दामन को सकू दे जाओ फिर से तुम काली घटाओ,
मेरे गम का ढेर बहुत बढ़ गया, आकर तुम जरा इन्हे बटाओ.

खुश्बुओ की हवा न चली बीते बरसो, बहा दो बयार गुलशन को महकाओ,
आगन सुनसान सुरिली साज़ न बजी, गीत गुनगुनाओ आशियाना चहकाओं.
भूला दिल ईश्क की रूमानियत, बहारो को खिलाओ मुझे फिर बहकाओ,
छुप गया सूरज मुक्कदर का, सितारों से तुम मेरी तन्हा रात चमकाओ.

नजरो की बेकरारी की आग बुझाओ, बस कुछ पल फिर मेरे साथ बिताओ,
फिर इस जिस्म में साँस डाल जाओ, अपनी अदाओ से मुझको सताओ.
वो सुने हुये पुराने नगमे फिर तुम गाओ, फिर से वो पुराना जावेदा प्यार जताओ,
मै हू बहुत अकेला, मुझे तुम मेरी मंजिल तक पहुचाओ.

Monday, November 02, 2009

वही मेरे साज बन गये..


टूटे सपनों के ख़यालात की नुमाइंदगी ही मेरे साज़ बन गये,
मेरे दिल के जख्मों के नुमाईश की अदा ही मेरे आज बन गये.
सूखी दरिया में बहता है खून मेरे शरीर का ये ही मेरे राज़ बन गये,
तन्हाई में आता है मुझे सुकून,अकेलेपन के किस्से ही मेरे ताज बन गये.

दुनिया की बेवफाई के चर्चे हो रहे महफिलों में अब तो ये ही मेरे अंदाज़ बन गये,
टूटे दिलों को जो दे कुछ राहत,लोग वो ही मेरे नये नज्मों की आवाज़ बन गये.
ज़माने भर से पुछू दर्द के रिहाई की चाबी कुछ ऐसे अ़ब मेरे मिजाज़ बन गये,
एक बार मर फिर शुरू की जिंदगी इसी दास्ता के किस्से मेरे आगाज बन गये.

ज़हर के प्याले का कड़वा घूट पिया था कभी,नशा उसका ही मेरे अहसास बन गये,
राह में मिले कांच के टुकड़े बने गहरे घाव,देखो आज वो ही मेरे लिबास बन गये.
एक बार किसी ने बोला तुम अ़ब नहीं हमारे,बाद उसके दिन मेरे कुछ उदास बन गये,
उसी अकेलेपन की सोहबत का असर,दिल के आंसू बह गये,वही मेरे साज़ बन गये.